बिहार में ज़मीन से जुड़ा लगभग हर काम अब ऑनलाइन हो चुका है, लेकिन काम के हिसाब से पोर्टल बदल जाता है — और यही सबसे ज़्यादा उलझन की वजह बनता है। रोज़मर्रा में मौजूदा जमाबंदी, खतियान और भू-नक्शा biharbhumi.bihar.gov.in पर देखा जाता है; राज्य में चल रहे विशेष भूमि सर्वेक्षण की स्व-घोषणा और वंशावली dlrs.bihar.gov.in पर जमा होती है; और सालाना भू-लगान bhulagan.bihar.gov.in पर भरा जाता है। तीन काम, तीन अलग पोर्टल — यह गाइड हर एक को अलग-अलग, चरण-दर-चरण समझाती है, साथ ही ज़रूरी दस्तावेज़ों, आम गलतियों और शब्दावली की पूरी जानकारी भी देती है।

🔍 भूमि रिकॉर्ड एवं सर्वेक्षण सहायक

तीन सवालों के जवाब दें — सही पोर्टल, सही तरीका और ज़रूरी दस्तावेज़ों की तैयार सूची एक साथ मिलेगी। यह टूल केवल तैयारी में मदद करता है; असली जानकारी संबंधित सरकारी पोर्टल पर ही दर्ज करनी होती है।

✅ आपके लिए तैयार जानकारी

सही पोर्टल: -
🔎 खोजने/आवेदन का तरीका: -
पोर्टल पर जाने से पहले यह तैयार रखें:

    💡 जमाबंदी/खतियान/भू-नक्शा देखना और स्व-घोषणा/वंशावली जमा करना — दोनों निःशुल्क हैं। भू-लगान असली सरकारी राजस्व है, इसलिए वह निःशुल्क नहीं।

    📜

    जमाबंदी पंजी

    वर्तमान स्वामित्व देखें

    यहां देखें
    📄

    खतियान

    पुराना सर्वे रिकॉर्ड देखें

    यहां देखें
    🗺️

    भू-नक्शा

    प्लॉट का मानचित्र देखें

    यहां देखें
    💳

    भू-लगान

    सालाना भू-राजस्व ऑनलाइन भरें

    भुगतान करें
    🧾

    विशेष सर्वेक्षण

    स्व-घोषणा व वंशावली जमा करें

    यहां जाएं
    🔄

    परिमार्जन

    जमाबंदी की गलती सुधारें

    आवेदन करें
    📌 इस गाइड के बारे में

    यह गाइड बिहार सरकार के आधिकारिक पोर्टलों — biharbhumi.bihar.gov.in, dlrs.bihar.gov.in और bhulagan.bihar.gov.in — पर उपलब्ध सार्वजनिक जानकारी और आम उपयोगकर्ताओं को आने वाली समस्याओं के आधार पर तैयार की गई है, और समय-समय पर अपडेट की जाती है।

    यह वेबसाइट किसी भी सरकारी विभाग का हिस्सा नहीं है। इसलिए किसी भी कानूनी, बैंकिंग या अदालती काम के लिए हमेशा संबंधित आधिकारिक पोर्टल या अपने अंचल कार्यालय की जानकारी को अंतिम मानें। इस पेज को आखिरी बार अगस्त 2026 में समीक्षा कर अपडेट किया गया।

    तीन पोर्टल, तीन अलग काम — पहले यह समझें

    बिहार सरकार के राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के अंतर्गत आने वाला भू-अभिलेख एवं परिमाप निदेशालय (DLRS) राज्य के भूमि अभिलेखों के डिजिटलीकरण का काम देखता है। इसी के तहत तीन अलग-अलग नागरिक-सुविधा पोर्टल काम करते हैं, और इन्हें एक समझ लेना सबसे आम गलती है:

    • biharbhumi.bihar.gov.in — यहाँ से मौजूदा जमाबंदी, खतियान की प्रति और भू-नक्शा देखा जाता है। यह रोज़मर्रा के काम के लिए है, जैसे ज़मीन खरीदने से पहले स्वामित्व जांचना।
    • dlrs.bihar.gov.in — यह पोर्टल राज्य में चल रहे विशेष भूमि सर्वेक्षण के लिए है। यहाँ रैयत अपनी स्व-घोषणा (प्रपत्र-2) और वंशावली (प्रपत्र-3(1)) डाउनलोड, भर और जमा कर सकते हैं, और अपलोड की गई प्रति की स्थिति भी देख सकते हैं।
    • bhulagan.bihar.gov.in — यह पोर्टल सिर्फ ज़मीन का सालाना भू-लगान (भू-राजस्व) ऑनलाइन भरने के लिए है। इसका जमाबंदी देखने या सर्वेक्षण से कोई सीधा संबंध नहीं — यह पूरी तरह भुगतान से जुड़ा अलग काम है।
    biharbhumi.bihar.gov.in पोर्टल पर जमाबंदी और भू-नक्शा देखने का इंटरफेस
    💡 खतियान, जमाबंदी (पंजी-II) और भू-नक्शा में क्या अंतर है?

    खतियान: पिछले सर्वे-सेटलमेंट के समय तैयार किया गया मूल, ऐतिहासिक रिकॉर्ड — इसमें दर्ज नाम हमेशा मौजूदा मालिक का नहीं होता।

    जमाबंदी पंजी (पंजी-II): वर्तमान स्वामित्व का रिकॉर्ड — खाताधारी (रैयत) का नाम, खाता और खेसरा नंबर, जिसे अंचल कार्यालय दाखिल-खारिज के बाद अपडेट करता है। सरकारी दस्तावेज़ों में इसे अक्सर "पंजी-II" भी कहा जाता है।

    भू-नक्शा: ज़मीन का डिजिटल मानचित्र, जिसमें प्लॉट की सीमाएं, रकवा और स्थिति दिखती है।

    जमाबंदी की नकल में कौन-सी जानकारी होती है

    ऑनलाइन जमाबंदी की नकल पहली बार देखने पर उलझी हुई लग सकती है, क्योंकि इसमें एक साथ कई कॉलम होते हैं। नीचे दिए मुख्य हिस्सों को समझ लेने से नकल पढ़ना काफी आसान हो जाता है:

    कॉलमइसका मतलब
    खाता संख्याउस रैयत के नाम दर्ज सभी खेसरों का समूह-क्रमांक।
    खेसरा/प्लॉट संख्याकिसी एक खेत या भूखंड की पहचान संख्या।
    रकबाज़मीन का क्षेत्रफल — आमतौर पर एकड़-डिसमिल या हेक्टेयर-वर्गमीटर में।
    रैयत का नाम व पिता/पति का नामवर्तमान खाताधारी की पहचान।
    भूमि की किस्मरैयती, गैर-मजरुआ खास/आम आदि — नीचे भूमि के प्रकार वाली तालिका देखें।
    लगान/मालगुजारीउस ज़मीन पर देय वार्षिक भू-राजस्व की राशि, जो bhulagan.bihar.gov.in पर भरी जाती है।
    हिस्सेदारीअगर एक खाते में कई रैयत हैं, तो हर एक का हिस्सा (जैसे 1/3)।

    अगर नकल में कोई कॉलम खाली या अस्पष्ट दिखे, तो यह ज़रूरी नहीं कि गलती हो — कई बार पुराने रिकॉर्ड में वह जानकारी दर्ज ही नहीं हुई थी। ऐसे मामलों में अंचल कार्यालय से मूल पंजी दिखाने का अनुरोध किया जा सकता है।

    बिहार विशेष भूमि सर्वेक्षण — क्यों जानना ज़रूरी है

    🧾 सबसे ज़्यादा पूछा जाने वाला सवाल: स्व-घोषणा और वंशावली क्यों जमा करें?

    राज्य में चल रहे भूमि सर्वेक्षण के दौरान हर रैयत/खाताधारी से अपनी ज़मीन के बारे में स्व-घोषणा (प्रपत्र-2) और परिवार की वंशावली (प्रपत्र-3(1)) मांगी जा रही है। यह जानकारी DLRS की आधिकारिक वेबसाइट dlrs.bihar.gov.in पर उपलब्ध कराए गए फॉर्म के ज़रिए जमा होती है — वहीं से फॉर्म डाउनलोड भी होते हैं और अपलोड की गई प्रति की स्थिति भी देखी जा सकती है।

    अगर तय समय के भीतर यह जानकारी जमा नहीं होती, तो सर्वे के बाद बनने वाले नए रिकॉर्ड में स्वामित्व सही ढंग से दर्ज न होने का जोखिम रहता है — जिसका असर आगे चलकर दाखिल-खारिज, बिक्री, बंटवारे या लोन के समय दिख सकता है।

    सर्वेक्षण की प्रक्रिया — यह किन चरणों में होती है

    बिहार में चल रहा विशेष भूमि सर्वेक्षण कई चरणों में होता है। शुरुआत में ज़मीन की नाप-जोख और सीमा-निर्धारण — जिसे किस्तवार कहा जाता है — होता है। इसके बाद खानापूरी चरण में हर खेसरे की जानकारी (रैयत का नाम, रकबा, भूमि का प्रकार, कब्ज़ा) दर्ज की जाती है — यहीं पर स्व-घोषणा और वंशावली मांगी जाती है। खानापूरी के बाद प्रारूप प्रकाशन (ड्राफ्ट रिकॉर्ड) जारी होता है, जिस पर रैयत तय समय-सीमा के भीतर दावा-आपत्ति दर्ज करा सकते हैं। आपत्तियों के निपटारे के बाद अंतिम प्रकाशन होता है और घर-घर पर्चा (LPM नक्शे सहित) बांटे जाते हैं।

    यह पूरा क्रम एक अंचल से दूसरे अंचल में अलग-अलग समय पर चल सकता है, और राज्यभर में समय-सीमा पहले भी कई बार आगे बढ़ चुकी है। इसलिए इस पेज पर किसी एक तारीख को अंतिम मानकर मत चलिए — अपने मौजा की सही और मौजूदा स्थिति के लिए हमेशा dlrs.bihar.gov.in ही देखें।

    dlrs.bihar.gov.in पोर्टल पर स्व-घोषणा और वंशावली जमा करने की प्रक्रिया

    स्व-घोषणा और वंशावली जमा करने से पहले क्या तैयार रखें

    • पुराना खतियान या जमाबंदी की प्रति
    • आधार कार्ड और सक्रिय मोबाइल नंबर (OTP सत्यापन के लिए)
    • परिवार के सभी हिस्सेदारों के नाम, रिश्ते और उम्र की जानकारी (वंशावली के लिए)
    • ज़मीन का खाता/खेसरा नंबर और अनुमानित रकवा
    • अगर रजिस्ट्री/बैनामा हुआ है, तो उसकी प्रति
    • अगर ज़मीन का बंटवारा हो चुका है तो बंटवारा-पत्र/समझौते की प्रति, न होने पर भी घबराने की ज़रूरत नहीं — बंटवारा न होने की स्थिति सर्वे में अलग से दर्ज होती है
    ⚠️ ध्यान रखें

    सर्वे की समय-सीमा, चरण और ज़िलेवार स्थिति समय-समय पर बदलती रहती है। इस पेज पर बताई गई सामान्य प्रक्रिया के अलावा, अपने ज़िले/अंचल की ताज़ा स्थिति के लिए हमेशा dlrs.bihar.gov.in या स्थानीय अंचल कार्यालय से ही अंतिम पुष्टि करें।

    भूमि रिकॉर्ड की जानकारी का उपयोग कहाँ होता है?

    • ज़मीन खरीदने से पहले: विक्रेता के स्वामित्व और मौजूदा बंधक (Mortgage) की पुष्टि के लिए जमाबंदी और भू-नक्शा दोनों साथ जांचें।
    • बैंक लोन: कृषि लोन या भूमि पर आधारित लोन के आवेदन में सहायक दस्तावेज़ के रूप में।
    • पारिवारिक बंटवारा या विवाद: खेत की सीमाओं और हिस्सेदारी की पुष्टि के लिए भू-नक्शा उपयोगी है।
    • सरकारी योजनाओं के लिए: कई कृषि व कल्याणकारी योजनाओं के आवेदन में जमाबंदी/रकबे का विवरण मांगा जाता है।
    • विशेष सर्वेक्षण के दौरान: मौजूदा स्वामित्व को नए रिकॉर्ड में सही दर्ज कराने के लिए स्व-घोषणा और वंशावली जमा करना।

    किस काम के लिए क्या देखें (Quick Reference)

    ज़रूरतक्या देखें/करेंपोर्टल
    ज़मीन खरीदने से पहले स्वामित्व जांचजमाबंदी पंजीbiharbhumi.bihar.gov.in
    सीमा/क्षेत्रफल का विवादभू-नक्शा (RS/CS दोनों जांचें)biharbhumi.bihar.gov.in
    पुराना ऐतिहासिक रिकॉर्ड चाहिएखतियानbiharbhumi.bihar.gov.in
    जमाबंदी में गलती सुधारनी हैपरिमार्जन आवेदनparimarjan.bihar.gov.in
    सालाना भू-लगान भरना हैऑनलाइन भुगतानbhulagan.bihar.gov.in
    विशेष सर्वेक्षण में हिस्सा लेना हैस्व-घोषणा (प्रपत्र-2) + वंशावली (प्रपत्र-3(1))dlrs.bihar.gov.in
    बैंक/कोर्ट के लिए प्रमाणित प्रतिअंचल कार्यालय से सत्यापित नकलसंबंधित अंचल कार्यालय

    ज़मीन के प्रकार जो जमाबंदी में दिखते हैं

    जमाबंदी या खतियान पढ़ते समय भूमि की प्रकृति (Nature of Land) का कॉलम अक्सर उलझा देता है। तीन मुख्य श्रेणियाँ समझ लें तो बाकी रिकॉर्ड पढ़ना आसान हो जाता है:

    प्रकारमतलब
    रैयती (Raiyati)निजी स्वामित्व वाली ज़मीन, जो किसी व्यक्ति/परिवार के नाम जमाबंदी में दर्ज होती है — खरीद-बिक्री और दाखिल-खारिज इसी श्रेणी में होते हैं।
    गैर-मजरुआ खास (Gair Mazarua Khas)सरकारी स्वामित्व वाली भूमि, जो सरकार के उपयोग या योजनाओं के लिए आरक्षित रहती है — सामान्यतः खरीद-बिक्री योग्य नहीं।
    गैर-मजरुआ आम (Gair Mazarua Aam)सार्वजनिक उपयोग की भूमि, जैसे चारागाह, तालाब, रास्ता या श्मशान — समुदाय के साझा उपयोग के लिए आरक्षित।

    भूलेख से जुड़े ज़रूरी शब्द (Glossary)

    बिहार में जमीन के रिकॉर्ड पढ़ते समय अक्सर ये शब्द सामने आते हैं — इनका मतलब जान लें तो रिकॉर्ड समझना आसान हो जाता है।

    शब्दमतलब
    अंचल (Anchal)भूमि प्रशासन की इकाई, उत्तर प्रदेश की तहसील के समान — यहीं से भूमि रिकॉर्ड अपडेट होते हैं।
    मौजा (Mauza)गाँव या राजस्व ग्राम, जिसके अंतर्गत खाता और खेसरा नंबर दर्ज होते हैं।
    खेसरा (Khesra)किसी खेत या भूखंड को दी गई पहचान संख्या — उत्तर प्रदेश के "खसरा" के समान।
    रैयत (Raiyat)भूमि का मालिक/खाताधारी, जिसके नाम जमाबंदी दर्ज होती है।
    दाखिल-खारिज (Mutation)ज़मीन खरीदने-बेचने या वरासत के बाद जमाबंदी में नए मालिक का नाम दर्ज करने की प्रक्रिया।
    परिमार्जन (Parimarjan)जमाबंदी में मौजूद गलती (जैसे नाम की स्पेलिंग) को ऑनलाइन ठीक कराने की प्रक्रिया।
    स्व-घोषणा — प्रपत्र-2विशेष सर्वेक्षण के दौरान रैयत द्वारा अपनी ज़मीन के बारे में दिया जाने वाला घोषणा-पत्र, जो dlrs.bihar.gov.in पर जमा होता है।
    वंशावली — प्रपत्र-3(1)परिवार के वंश-क्रम को दर्शाने वाला प्रपत्र, जो उत्तराधिकार में हिस्सेदारी स्पष्ट करने के लिए सर्वे में जमा किया जाता है।
    किस्तवार (Kistwar)सर्वेक्षण का वह चरण जिसमें ज़मीन की नाप-जोख और सीमा-निर्धारण किया जाता है।
    खानापूरी (Khanapuri)सर्वे का वह चरण जिसमें हर खेसरे की रैयत, रकबा व प्रकार जैसी जानकारी दर्ज की जाती है।
    दावा-आपत्तिसर्वे के प्रारूप प्रकाशन में गलती दिखने पर तय समय-सीमा में दर्ज कराई जाने वाली आपत्ति।
    RS / CS सर्वेभू-नक्शा में दिखने वाले सर्वे प्रकार — CS पुराना कैडेस्ट्रल सर्वे है, RS उसके बाद का रिविजनल सर्वे। दोनों के खेसरा नंबर अलग हो सकते हैं, इसलिए सही सर्वे प्रकार चुनना ज़रूरी है।
    LPM रिपोर्टभू-नक्शा पोर्टल से प्लॉट की पूरी माप और सीमा की जानकारी वाली PDF रिपोर्ट, जिसे डाउनलोड/प्रिंट किया जा सकता है।
    LPC (भू-स्वामित्व प्रमाण पत्र)Land Possession Certificate — भूमि पर कब्ज़े/स्वामित्व का प्रमाण पत्र।
    भू-लगानज़मीन पर हर साल देय सरकारी राजस्व/कर, जो bhulagan.bihar.gov.in पर ऑनलाइन भरा जाता है।

    जमाबंदी पंजी ऑनलाइन कैसे देखें (चरण-दर-चरण)

    1. पोर्टल खोलें: biharbhumi.bihar.gov.in पर जाएं और "जमाबंदी पंजी देखें" विकल्प चुनें।
    2. जिला और अंचल चुनें: ड्रॉपडाउन से अपना जिला और अंचल (सर्कल) चुनें।
    3. मौजा चुनें: सूची में से अपने मौजा (गाँव) का नाम चुनें।
    4. खोज का तरीका चुनें: खाता संख्या, खेसरा संख्या या खाताधारी के नाम में से कोई एक विकल्प चुनें।
    5. जमाबंदी देखें और सेव करें: विवरण स्क्रीन पर दिखेगा — ज़रूरत होने पर प्रिंट करें या PDF सेव कर लें।

    भू-नक्शा कैसे देखें

    1. पोर्टल खोलें: biharbhumi.bihar.gov.in पर जाएं और भू-नक्शा विकल्प चुनें।
    2. जिला, अंचल और मौजा चुनें: नक्शा उस क्षेत्र के लिए स्क्रीन पर दिखेगा।
    3. सर्वे प्रकार जांचें: RS या CS — दोनों में खेसरा नंबर अलग हो सकते हैं, इसलिए सही प्रकार चुनना ज़रूरी है।
    4. खेसरा नंबर पर क्लिक करें: जिस प्लॉट की जानकारी चाहिए, उस पर क्लिक करें।
    5. विवरण देखें: खाताधारी का नाम, रकवा और चौहद्दी स्क्रीन पर दिखेगी — LPM रिपोर्ट PDF में डाउनलोड की जा सकती है।

    भू-लगान (ऑनलाइन भू-राजस्व) कैसे भरें

    जमाबंदी की तरह भू-लगान भरना भी अब पूरी तरह ऑनलाइन है, बस पोर्टल अलग है:

    1. पोर्टल खोलें: bhulagan.bihar.gov.in पर जाएं और "ऑनलाइन भुगतान करें" विकल्प चुनें।
    2. ज़मीन खोजें: जिला, अंचल और मौजा चुनें, फिर खाता संख्या, खेसरा संख्या, रैयत के नाम या जमाबंदी संख्या में से किसी एक तरीके से खोजें।
    3. देय राशि देखें: स्क्रीन पर चालू वर्ष का लगान, बकाया (अगर कोई हो) और कुल देय राशि दिखेगी।
    4. भुगतान करें: डेबिट/क्रेडिट कार्ड, नेट बैंकिंग या UPI में से कोई तरीका चुनकर भुगतान पूरा करें।
    5. रसीद सुरक्षित रखें: सफल भुगतान के बाद PDF रसीद डाउनलोड करें — इसमें मौजूद Transaction ID आगे किसी विवाद की स्थिति में काम आता है।

    रिकॉर्ड न मिलने या भुगतान अटकने के सामान्य कारण

    🚫 रिकॉर्ड न मिलने के सबसे आम कारण
    1. गलत अंचल/मौजा चुनना: कई मौजों के नाम मिलते-जुलते होते हैं — सही अंचल की सूची में से ही मौजा चुनें।
    2. नाम की स्पेलिंग में अंतर: अगर रिकॉर्ड में रैयत का नाम पुरानी वर्तनी में दर्ज है, तो नाम से खोज पर परिणाम नहीं मिलेगा — खेसरा/खाता संख्या से खोजें।
    3. दाखिल-खारिज लंबित होना: हाल ही में हुई खरीद-बिक्री का दाखिल-खारिज पूरा न होने पर जमाबंदी में पुराना नाम ही दिखता रहता है।
    4. मौजा में सर्वे सक्रिय होना: अगर आपका मौजा विशेष सर्वेक्षण के दायरे में सक्रिय है, तो पुराना भू-नक्शा/खेसरा अस्थायी रूप से बदल सकता है — ऐसी स्थिति में अंचल कार्यालय से पुष्टि करें।
    5. पोर्टल पर तकनीकी दिक्कत: सरकारी पोर्टल व्यस्त समय में धीमे या डाउन हो सकते हैं — कुछ घंटे बाद या सुबह जल्दी दोबारा कोशिश करें।

    भू-लगान का ऑनलाइन भुगतान करते समय कई बार भुगतान गेटवे और पोर्टल के बीच पुष्टि में देरी हो जाती है, जिससे पैसा कटने के बाद भी तुरंत रसीद नहीं दिखती। ऐसी स्थिति में तुरंत दोबारा भुगतान न करें — 24-48 घंटे रुककर पोर्टल पर "लंबित भुगतान" सेक्शन में स्थिति जांचें; राशि सफल होते ही वहीं से रसीद मिल जाती है। इसके बाद भी समस्या बनी रहे तो लेन-देन की जानकारी (Transaction ID) के साथ नीचे दी गई हेल्पलाइन पर संपर्क करें।

    ज़रूरी जानकारी और फीस

    • जमाबंदी / खतियान देखना: पूरी तरह निःशुल्क।
    • भू-नक्शा देखना: पूरी तरह निःशुल्क।
    • परिमार्जन (सुधार) आवेदन: सामान्यतः निःशुल्क।
    • विशेष सर्वेक्षण की स्व-घोषणा/वंशावली: पूरी तरह निःशुल्क।
    • भू-लगान (भू-राजस्व): यह वास्तविक सरकारी कर है, इसलिए निःशुल्क नहीं — राशि ज़मीन के प्रकार और रकवे के अनुसार अलग होती है, और खोजते ही पोर्टल पर दिख जाती है।
    • दाखिल-खारिज / LPC जैसी सेवाएं: कुछ सेवाओं पर मामूली सरकारी शुल्क लग सकता है — आवेदन के समय पोर्टल पर ही दिख जाएगा।

    हेल्पलाइन और संपर्क

    📞 तकनीकी समस्या होने पर

    जमाबंदी, भू-नक्शा, भू-लगान या दाखिल-खारिज से जुड़ी किसी तकनीकी समस्या के लिए राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग की टोल-फ्री हेल्पलाइन 1800-345-6215 पर संपर्क किया जा सकता है। कॉल करते समय अपना खाता/खेसरा नंबर, आवेदन संख्या या Transaction ID साथ रखें, इससे समस्या जल्दी समझाई जा सकती है। ज़मीन के मालिकाना हक़ से जुड़े विवादों के लिए हेल्पलाइन के बजाय सीधे अपने अंचल कार्यालय से मिलना ज़्यादा कारगर रहता है।

    अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

    जमाबंदी पंजी (पंजी-II) और खतियान में क्या अंतर है?
    खतियान पिछले सर्वे-सेटलमेंट के समय बना मूल, ऐतिहासिक रिकॉर्ड है, जबकि जमाबंदी पंजी — जिसे सरकारी भाषा में पंजी-II भी कहा जाता है — वर्तमान स्वामित्व को दर्शाती है और दाखिल-खारिज के बाद अंचल कार्यालय द्वारा अपडेट होती रहती है। मौजूदा मालिकाना हक़ के लिए जमाबंदी (पंजी-II) ही देखनी चाहिए।
    biharbhumi.bihar.gov.in, dlrs.bihar.gov.in और bhulagan.bihar.gov.in — तीनों पोर्टल में क्या फर्क है?
    biharbhumi.bihar.gov.in से मौजूदा जमाबंदी, खतियान और भू-नक्शा की प्रति देखी जाती है। dlrs.bihar.gov.in विशेष भूमि सर्वेक्षण के लिए है, जहां स्व-घोषणा (प्रपत्र-2) और वंशावली (प्रपत्र-3(1)) जमा होती है। तीसरा पोर्टल bhulagan.bihar.gov.in है, जहां से सिर्फ ज़मीन का सालाना भू-लगान ऑनलाइन भरा जाता है — यह जमाबंदी देखने या सर्वेक्षण से पूरी तरह अलग, भुगतान से जुड़ा काम है।
    विशेष भूमि सर्वेक्षण में स्व-घोषणा नहीं भरी तो क्या होगा?
    अगर तय समय में स्व-घोषणा और वंशावली जमा नहीं होती, तो नए सर्वे रिकॉर्ड में स्वामित्व सही से दर्ज न होने का जोखिम रहता है, जिससे आगे चलकर दाखिल-खारिज, बिक्री या लोन के समय दिक्कत आ सकती है। अपने अंचल की मौजूदा समय-सीमा dlrs.bihar.gov.in पर ज़रूर जांच लें, क्योंकि यह राज्यभर में कई बार आगे बढ़ चुकी है।
    biharbhumi.bihar.gov.in पर मेरी ज़मीन का रिकॉर्ड नहीं मिल रहा, क्या करूं?
    जिला, अंचल और मौजा का चयन दोबारा जांचें, क्योंकि मिलते-जुलते नाम वाले मौजा अक्सर भ्रम पैदा करते हैं। खाताधारी के नाम की पुरानी वर्तनी होने पर नाम से खोज असफल हो सकती है — ऐसे में खाता या खेसरा संख्या से खोजें। समस्या बनी रहे तो अंचल कार्यालय से संपर्क करें।
    जमाबंदी में गलती है तो कैसे ठीक कराएं?
    जमाबंदी की गलती parimarjan.bihar.gov.in पर "परिमार्जन" आवेदन के ज़रिए ठीक कराई जाती है। दस्तावेज़ अपलोड करने के बाद अंचल कार्यालय स्तर पर सत्यापन होता है, तभी सुधार दर्ज होता है।
    क्या बिहार भूमि पोर्टल से मिली जमाबंदी की प्रति हर जगह मान्य है?
    पोर्टल से मिली प्रति आमतौर पर जानकारी और संदर्भ के लिए काम आती है। बैंक लोन, कोर्ट या रजिस्ट्री जैसे आधिकारिक कामों के लिए संबंधित अंचल कार्यालय से प्रमाणित प्रति ज़रूरी होती है।
    सर्वे के प्रारूप प्रकाशन (ड्राफ्ट) में गलती दिखे तो दावा-आपत्ति कैसे दर्ज करें?
    अगर प्रारूप प्रकाशन में रकबा, नाम या हिस्सा गलत दिखे, तो तय आपत्ति-अवधि के भीतर संबंधित सर्वे शिविर या अंचल कार्यालय में सहायक दस्तावेज़ों की प्रति के साथ दावा-आपत्ति दर्ज कराई जा सकती है। सटीक प्रक्रिया व फॉर्म dlrs.bihar.gov.in या सर्वे शिविर में बताई जाती है, इसलिए आपत्ति-अवधि शुरू होते ही वहां जांच लें।
    भू-लगान ऑनलाइन भरने के बाद पैसा कट गया पर रसीद नहीं मिली, क्या करें?
    भुगतान गेटवे और पोर्टल के बीच पुष्टि में देरी से ऐसा हो सकता है। तुरंत दोबारा भुगतान न करें — 24-48 घंटे रुककर bhulagan.bihar.gov.in पर "लंबित भुगतान" सेक्शन में स्थिति जांचें; राशि सफल होते ही वहीं से रसीद मिल जाती है। समस्या बनी रहे तो Transaction ID के साथ हेल्पलाइन पर संपर्क करें।
    क्या जमाबंदी, भू-नक्शा और भू-लगान मोबाइल फोन से देखे/भरे जा सकते हैं?
    हां, तीनों पोर्टल मोबाइल के ब्राउज़र (जैसे Chrome) में भी खुल जाते हैं, इसके लिए अलग ऐप ज़रूरी नहीं। ध्यान रहे कि छोटी स्क्रीन पर ड्रॉपडाउन और नक्शा ज़ूम करने में थोड़ी दिक्कत हो सकती है, इसलिए भू-नक्शा जैसी जटिल जानकारी के लिए संभव हो तो बड़ी स्क्रीन (लैपटॉप/कंप्यूटर) का उपयोग बेहतर रहता है।
    बिहार भूमि से जुड़ी किसी समस्या के लिए हेल्पलाइन नंबर क्या है?
    जमाबंदी, भू-नक्शा, भू-लगान या दाखिल-खारिज से जुड़ी तकनीकी समस्या के लिए राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग की टोल-फ्री हेल्पलाइन 1800-345-6215 पर संपर्क किया जा सकता है।